मनुष्य के दुखों का मूल कारण है पाप कर्म, पाप कर्म बढ़ जाने पर मनुष्य को बीमारियां घेर लेती है बीमारी किसी भी प्रकार की हो सकती हैं (कैंसर,कोविड-19, टीबी, एड्स आदि)
या हम यूं कहें की कोई भी दुख कोई भी रोग हमें तीन ताप के कारण होता है और तीन ताप का नाश केवल कबीर परमात्मा ही कर सकते हैं
पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में प्रमाण है कि सत्य भक्ति करने वाले साधक के पूर्ण परमात्मा घोर पाप को भी नाश कर देता है
मनुष्य के बुरे कर्म जब बढ़ जाते हैं तो प्रकृति उससे नाराज हो जाती है और फिर उस पर कहर बरसाना शुरू कर देती है
ब्रह्मा विष्णु महेश पाप कर्म को नहीं काट सकते मृत्यु शैया पर पहुंच चुके रोगी को ये जिंदा नहीं कर सकते क्योंकि ये सीमित शक्ति के भगवान हैं वह असीमित शक्ति के भगवान तो कबीर परमेश्वर है जो किसी भी खतरनाक बीमारी को जड़ से समाप्त कर सकते हैं
ऋग्वेद मंडल नंबर 10 सुक्त 161 मंत्र 2 में लिखा है कि यदि रोगी मृत्यु के निकट पहुंच गया हो तो भी पूर्ण परमात्मा (कविर्देव) अपनी शरण में आए हुए साधक के रोग को नष्ट करके उसे 100 वर्ष की आयु प्रदान कर देता है
पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर जी के अवतार जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नामदिक्षा लेकर भक्ति करने से असाध्य रोग से ग्रसित व्यक्ति भी तुरंत ठीक हो जाता है
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