Wednesday, August 5, 2020

Our savior is the God kabir

मनुष्य के दुखों का मूल कारण है पाप कर्म, पाप कर्म बढ़ जाने पर मनुष्य को बीमारियां घेर लेती है बीमारी किसी भी प्रकार की हो सकती हैं (कैंसर,कोविड-19, टीबी, एड्स आदि)
या हम यूं कहें की कोई भी दुख कोई भी रोग हमें तीन ताप के कारण होता है और तीन ताप का नाश केवल कबीर परमात्मा ही कर सकते हैं
पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में प्रमाण है कि सत्य भक्ति करने वाले साधक के पूर्ण परमात्मा घोर पाप को भी नाश कर देता है


मनुष्य के बुरे कर्म जब बढ़ जाते हैं तो प्रकृति उससे नाराज हो जाती है और फिर उस पर कहर बरसाना शुरू कर देती है
ब्रह्मा विष्णु महेश पाप कर्म को नहीं काट सकते मृत्यु शैया पर पहुंच चुके रोगी को ये जिंदा नहीं कर सकते क्योंकि ये सीमित शक्ति के भगवान हैं वह असीमित शक्ति के भगवान तो कबीर परमेश्वर है जो किसी भी खतरनाक बीमारी को जड़ से समाप्त कर सकते हैं

ऋग्वेद मंडल नंबर 10 सुक्त 161 मंत्र 2 में लिखा है कि यदि रोगी मृत्यु के निकट पहुंच गया हो तो भी पूर्ण परमात्मा (कविर्देव) अपनी शरण में आए हुए साधक के रोग को नष्ट करके उसे 100 वर्ष की आयु प्रदान कर देता है
पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर जी के अवतार जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नामदिक्षा लेकर भक्ति करने से असाध्य रोग से ग्रसित व्यक्ति भी तुरंत ठीक हो जाता है


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Wednesday, July 15, 2020

शास्त्र विरुद्ध साधना व्यर्थ

पवित्र श्रीमद भगवद गीता अध्याय 6 के श्लोक 16 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि हे अर्जुन ये भक्ति, योग साधना ना तो अधिक खाने वाले की ओर ना ही बिल्कुल ना खाने वाले की सफल हो सकती। अर्थात व्रत आदि करना व्यर्थ साधना है 

शास्त्र विरुद्ध पूजा व्यर्थ

 पवित्र श्रीमद भगवद गीता अध्याय 16 श्लोक 23 और 24 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि अर्जुन शास्त्र विधि को त्याग कर मनमाना आचरण करते हैं उनको न तो किसी प्रकार का लाभ मिलता और ना ही उनके कोई कार्य सिद्ध होते तथा ना ही वे मोक्ष को प्राप्त कर सकते!

शास्त्र अनुकूल भक्ति क्या है

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 के श्लोक 23 में गीता ज्ञान दाता ने ओम, तत्, सत ये तीन मंत्र मोक्ष के बताएं हैं इन तीन मंत्रों के जाप से ही मुक्ति संभव है तथा इसके अलावा गीता अध्याय 4 के श्लोक 34 में कहा है की उस तत्वज्ञान को तू उन तत्वदर्शी संत के पास जाकर समझ उनको भली-भांति दंडवत प्रणाम करने से वे तुझे तत्वज्ञान का उपदेश करेंगे और फिर जैसे वे साधना बताएं वैसे भक्ति साधना कर उसी से तेरा मोक्ष संभव है


पूर्ण परमात्मा (अविनाशी पुरुष) कौन है

वेद गवाही देते हैं की 6 दिन में सृष्टि की रचना करने वाला पाप कर्मों को हरण करने वाला, वह सर्वोउत्पादक प्रभु कबीर साहिब है जो सतलोक के तीसरे मुक्तिधाम में राजा के समान सिंहासन पर विराजमान है

ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 82 मंत्र 1 में लिखा है कि वह सर्वोत्पादक प्रभु , सृष्टि की रचना करने वाला, पाप कर्मो को हरण करने वाला राजा के समान दर्शनीय है 👉इससे सिद्ध हुआ कि परमात्मा साकार है

पवित्र सामवेद संख्या 359 अध्याय 4 खंड 25 श्लोक 8 में प्रमाण है कि जो (कविर्देव) कबीर साहिब तत्वज्ञान लेकर संसार में आता है वह सर्वशक्तिमान सर्व सुखदाता और सर्व के पूजा करने योग्य है


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Wednesday, July 8, 2020

True Guru Saint Rampal Ji

पूर्ण गुरु के बिना मोक्ष संभव नहीं

यह तो सभी जानते हैं कि गुरु के बिना मुक्ति नहीं हो सकती पूर्ण मोक्ष के लिए हमें गुरु बनाना अति आवश्यक है। जैसा कि इतिहास गवाह है कि बड़े-बड़े महापुरुषों ने भी गुरु धारण किया है श्री राम और श्री कृष्ण ने भी गुरु धारण किया था। यानी हमें इस लोक से पार होने के लिए गुरु बनाना अति आवश्यक है यहां तक की कबीर जी स्वयं परमात्मा होते हुए भी उन्होंने स्वामी रामानंद जी को गुरु धारण किया था। इनको गुरु धारण करने की कोई आवश्यकता भी नहीं थी, लेकिन गुरु परंपरा और भक्ति मर्यादा को बनाए रखने के लिए उन्होंने गुरु धारण किया था।
 

लेकिन आज भक्त समाज के सामने सबसे बड़ी समस्या ये है कि वह पूर्ण संत सच्चा आध्यात्मिक गुरु कौन हो सकता है। 

दुनिया के सभी देशों में भारत एक ऐसा देश है जहां अनेकों धर्म और  समुदाय को माना जाता है। और यही कारण है कि भारत में हजारों लाखों व्यक्ति गुरु पद पर विराजमान है, लेकिन हमें यह जानना बेहद जरूरी होगा कि उन हजारों लाखों की भीड़ में आखिर वह सच्चा आध्यात्मिक गुरु कौन है, जी हां हमें सबसे पहले यह जानना होगा कि उस संत का ज्ञान शास्त्रों से कितना मेल खाता है यदि जिसका ज्ञान वेद और शास्त्रों से मेल खाता है और जिनको पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति हुई है वह वास्तव में सच्चा अध्यात्मिक गुरु है जी हां दोस्तों इस दुनिया में वह महान संत तथा अध्यात्मिक  गुरु केवल जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज है जिनका ज्ञान वेद और शास्त्रों से मेल खाता है तथा जिनको परमात्मा की प्राप्ति हुई। 
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Wednesday, July 1, 2020

History of Namdev

एक समय की बात है नामदेव नाम का एक भगत था जो परमेश्वर कबीर जी का शिष्य बना। कबीर परमेश्वर जी का शिष्य बनने से पहले नामदेव जी ओम नाम का जाप करते थे तथा देवी-देवताओं की पूजा किया करते थे। 

उसके बाद एक दिन उनको परमेश्वर कबीर जी मिले जैसा कि सूक्ष्म वेद में बताया गया है कि वह परमात्मा पूर्व जन्मों के शुभ संस्कारी प्राणियों को सतलोक से आकर मिलते हैं उनको अपना तत्वज्ञान समझाते हैं और फिर उन्हें मोक्ष का रास्ता दिखाते हैं

 ठीक इसी प्रकार एक समय कबीर परमेश्वर जी नामदेव जी को मिले तथा जैसी उनकी भक्ति में आस्था थी उसी आस्था को मध्य नजर कबीर परमेश्वर ने उनको ओम नाम जाप करने को दिया। तथा नामदेव जी ओम नाम का जाप करने लगे। 

एक समय की बात है एक मंदिर में आरती पूजा चल रही थी, तो नामदेव जी उस रास्ते से गुजर रहे थे, नामदेव जी की आत्मा इतनी आत्मविभोर हो उठी कि उस मंदिर के पीछे बैठकर अपनी चप्पलों से घंटी बजाने लगे तब कबीर परमेश्वर जी ने अपने भगत की आस्था और इस मर्यादा को बनाए रखने के लिए उस मंदिर को ही घुमा दिया था यानी नामदेव जी जिस मंदिर के पीछे बैठे थे उस मंदिर का मुंह नामदेव जी की तरफ कर दिया। 


इस प्रकार कबीर परमेश्वर जी अपनी भक्ति मर्यादा और लोगों में भगवान की आस्था बनाए रखने के लिए अपने भक्तों के साथ ऐसे ऐसे चमत्कार करते रहते हैं। 

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Wednesday, June 24, 2020

True Spritual Knowledge

अब्राहिम सुल्तान अधम ➖

एक समय की बात है कबीर परमेश्वर जी जब इस धरती पर अवतरित हुए थे तब सेऊ, समन और नेकी ने उनकी शरण ग्रहण की थी। तथा परमेश्वर के बताए अनुसार भक्ति साधना कर रहे थे, कबीर परमेश्वर जी एक संत की लीला करके अपना ज्ञान प्रचार कर रहे थे उस पूर्ण परमात्मा सत्पुरुष के बारे में यथार्थ सच्चाई समाज को बता रहे थे तथा पाखंड को समाप्त कर रहे थे। उस समय काफी श्रद्धालुओं ने कबीर परमेश्वर जी के चमत्कारों को देखकर उनकी शरण ग्रहण की थी जिनमें से सम्मन सेऊ और नेकी एक ही परिवार के तीन भगत कबीर जी के शिष्य बने थे, तथा जन-जन तक परमेश्वर के ज्ञान को फैला रहे थे। 
    एक समय कबीर परमेश्वर जी और उनके दो सेवक उनके द्वार पर आ गए तब उनके घर पर संतो को आहार कराने के लिए आटा भी नहीं था तो कबीर परमेश्वर जी तथा सेवकों को भोजन कराने के लिए समन ने अपने पुत्र सेऊ की बलि भी दे दी थी। तथा पुनः परमेश्वर ने उसे जीवित कर दिया था। तब सेउ, सम्मन और नेकी को तो परमेश्वर ने इसी जन्म में पार कर दिया तथा सम्मन के मन में एक उत्सुकता रह गई कि यदि मैं धनी होता मेरे पास धन होता तो मुझे अपने बेटे का सिर नहीं कलम करना पड़ता, तब अंतर्यामी परमेश्वर ने उसके मन की बात जानकर उसे अगले जन्म में 9 शेरवा का बादशाह बना दिया तथा 70 गंज धन दे दिया। एक गंज में कई करोड़ धन होता है। तथा मालामाल कर दिया। 
     उस जन्म में फिर परमेश्वर उनको मिले तथा भक्ति की प्रेरणा की लेकिन उस जन्म में भी समन वाली आत्मा पार नहीं हो पाई तथा फिर अगला जन्म सुल्तान अधम के नाम से बलख बुखारा इराक में उनका जन्म हुआ तथा फिर परमेश्वर उनको मिले और भक्ति की प्रेरणा की उनको कई बार परमेश्वर मिले और अंततः उस जन्म में सुल्तान अधम को परमेश्वर ने पार कर दिया। 
परमात्मा कबीर साहिब जी बताते हैं
भक्ति बिना क्या होत है ये भ्रम रहा संसार! 
रति कंचन पाया नहीं रावण चलती बार!!
अवश्य देखें 👉ईश्वर टीवी चैनल रात्रि 8:30
मनुष्य जन्म का मिलना बहुत ही दुर्लभ है यदि मनुष्य जन्म मिलने के बाद प्राणी पूर्ण परमात्मा की भक्ति नहीं करता है तो उसे अत्यधिक कष्टों का सामना करना पडता है इसी का नतीजा आप देख रहे हैं कोरोनावायरस
वर्तमान समय में पूरे विश्व में एकमात्र तत्वदर्शी संत, पूर्ण गुरु केवल संत रामपाल जी महाराज है जो वेद और शास्त्रों के अनुसार यथार्थ भक्ति मार्ग बता रहे हैं
इस दुनिया में संत रामपाल जी महाराज एकमात्र तत्वदर्शी संत हैं जिन्होंने शास्त्रों में छुपे हुए गूढ़ रहस्यों को भक्त समाज के सामने बताया है
अधिक जानकारी के लिए देखिए👉 साधना टीवी चैनल शाम 7:30 बजे

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Sukshm Ved

Sukshm Ved

सूक्ष्म वेद (स्वसमवेद बोध)

पवित्र हिंदू धर्म के साथ-साथ अन्य धर्मों में भी पवित्र वेदों को विशेष माना जाता है पवित्र चारों वेद पूर्ण परमात्मा की महिमा का ही बखान करते हैं लेकिन इन चारों वेदों में वर्णित विधि से पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति नहीं हो सकती पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति सूक्ष्मवेद में वर्णित विधि से होती है जिसके विषय में पवित्र श्रीमदभगवद गीता अध्याय 4 के श्लोक 34 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि हे अर्जुन उस तत्वज्ञान को जो सूक्ष्म वेद में वर्णित है उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी संत के पास जाकर समझ वह तत्वदर्शी संत तुझे उस परमात्म तत्व का ज्ञान कराएंगे
पवित्र गीता अध्याय 15 के श्लोक 4 में भी कहा है कि तत्वज्ञान की प्राप्ति के पश्चात परमेश्वर के उस परमपद की खोज करनी चाहिए जहां जाने के बाद साधक कभी लौटकर इस संसार में नहीं आते अर्थात पूर्ण मोक्ष प्राप्त कर लेते हैं
सृष्टि के प्रारंभ में सागर मंथन के दौरान ज्योति निरंजन (काल) ब्रह्म (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के पिता की श्वासों के माध्यम से चारों वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) प्रकट हुए थे तब ज्योति निरंजन, (ब्रह्म) ने देखा कि इन वेदों में तो पूर्ण परमात्मा की संपूर्ण जानकारी लिखी हुई है तब उसने पूर्ण परमात्मा के विशेष ज्ञान को इन वेदों में से हटा दिया यानी सूक्ष्म वेद के रहस्य को समाप्त कर दिया

 जब इस काल भगवान ने पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर के यथार्थ ज्ञान को वेदों में से समाप्त कर दिया था तब उस परमेश्वर ने उसी पांचवे वेद (जिसे सूक्ष्म वेद कहते हैं) का ज्ञान ज्यों का त्यों बताने के लिए स्वयं इस पृथ्वी लोक पर अवतरित होते हैं कवियों की तरह आचरण करते हैं और अपना ज्ञान अपने मुख कमल से दोहो, लोकोक्तियों और चौपाइयों के माध्यम से सुनाते हैं और परमेश्वर के उस ज्ञान को महापुरुषों द्वारा संग्रहित कर लिया जाता है और फिर उसे एक ग्रंथ का रूप दे दिया जाता है जिसे सूक्ष्म वेद कहते हैं
इसी सूक्ष्म वेद के माध्यम से कबीर परमेश्वर जी अपनी महिमा और सतलोक के बारे में यथार्थ जानकारी देते हैं
 कबीर परमेश्वर जी कहते हैं कि
 वेद मेरा भेद है मैं ना मिलूं वेद से नाही
और जोन वेद से मैं मिलूं ये वेद जानते नाहीं

अर्थात इन चारों वेदों में (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति का पूर्ण ज्ञान नहीं है इनके अलावा एक सूक्ष्म वेद और है जिसमें पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति यानी काल जाल से मुक्त होने का रास्ता बताया गया है कबीर परमेश्वर के ज्ञान की पहचान इसी सूक्ष्म वेद के माध्यम से होती है

पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर जी प्रत्येक युग में इस धरती पर अवतरित होते हैं वे सशरीर आते हैं और सशरीर चले जाते हैं उनकी परवरिश के लिए कंवारी गायों से होती है अर्थात कुंवारी गायों के दूध से ही उनका पालन पोषण होता है
कबीर परमात्मा अपना मुख्य उद्देश्य लेकर इस धरती पर अवतरित होते हैं और वे बचपन से ही बड़े-बड़े ऋषि महर्षियों के अध्यात्म ज्ञान में छक्के छुड़ा देते हैं उनके तत्वज्ञान के सामने कोई भी ऋषि महर्षि टिक नहीं पाते और वे प्रत्येक युग में अपनी प्यारी आत्माओं को मिलते हैं तथा उनको सतलोक अपना निज धाम दिखाते हैं पूर्ण अध्यात्म ज्ञान से परिचित करवाते हैं और फिर उनको अपना गवाह तैयार कर लेते हैं
कबीर परमेश्वर जी कहते हैं

 जो देखेगा मेरे धाम को
 सो जानत है मुझ

सूक्ष्म वेद के माध्यम से परमेश्वर ने बताया है कि

हिंदू तुरक आदिक सब जेते जीव जहान
 सतनाम की साख गहै पावैं पद निर्बान

यथा सरीतगण आपही मिलै सिंधु में धाय
 सत सुकृत के मध्य तिमी सबही पंथ समाय

कबीर परमेश्वर जी ने इस वाणी के माध्यम से बताया है कि जिस प्रकार से वर्षा के दिनों में छोटी मोटी नदी नाले सभी मिलकर एक दरिया का रूप ले लेते हैं यानी सभी छोटी मोटी नदियां भी उस समय एक बड़ी नदी का रूप धारण कर लेते हैं अर्थात उसी बडी दरिया में समा जाते हैं ठीक इसी प्रकार कबीर परमेश्वर जी ने बताया है कि जब मेरा अंश कलयुग में अवतार लेगा यानी जब कलयुग 5505 वर्ष बीत जाएगा तब ये सभी नकली पंथ जो भिन्न-भिन्न नाम से चल रहे हैं उस समय ये सभी मेरे द्वारा चलाए गए असली कबीर पंथ में इस प्रकार आकर समा जाएंगे जैसे छोटी मोटी नदी नाले एक बड़ी दरिया में समा जाते हैं

सबही नर नारी शुद्ध तब जब ठीक का दिन आवंत
कपट चातुरी छोड़कर शरण कबीर गहंत

एक अनेक हो गए पुनः अनेक हो एक
हंस चलैं सतलोक को सब सतनाम की टेक

घर-घर बोध विचार हो दुर्मति दूर बहाए
कलयुग एक है सोई बरतै सहज सुभाए

कहां उग्र कहां शूद्र हो हर सबकी भवभीर
सो समान समदृष्टि है समरथ सत्य कबीर

जबलग पूर्ण होए नहीं ठीक का तिथी वार
कपट चातुरी तबहिलों स्वसमवेद निराधार

सूक्ष्म वेद की इस वाणी के माध्यम से कबीर परमेश्वर जी ने बताया है कि धर्मदास जो मैं आज यह बात कह रहा हूं कि यह सभी पंथ समाप्त हो जाएंगे एक ही कबीर पंथ रह जाएगा एक ही भगवान की भक्ति किया करेंगे और कपट, चतुराई, रागद्वेष, चोरी - जारी सभी प्रकार के झगड़े समाप्त हो जाएंगे जाति धर्म  के भेदभाव समाप्त हो जाएंगे घर-घर में पूर्ण परमात्मा की भक्ति किया करेंगे और सभी नर और नारी शुद्ध हो जाएंगे उनमें दोष नहीं रहेगा तो ये मेरा वचन सूक्ष्म वेद के माध्यम से कही गई ये वाणी जब तक कलयुग 5505 वर्ष नहीं बीत जाएगा तब तक तो यह निराधार ही नजर आएंगे और जब कलयुग 5505 वर्ष बीत जाएगा तब ये वाणी सच साबित होगी


पांच सहंस अरू पांच सो जब कलयुग बीत जाए
महापुरुष फरमान तब जग तारण को आए

 इस वाणी के माध्यम से  कबीर परमेश्वर जी कह रहे हैं कि हे धर्मदास जब कलयुग 5505 वर्ष बीत जाएगा तब उस समय एक महापुरुष अवतार लेगा जो पूरे विश्व का कल्याण करेगा उस महापुरुष के बारे में दुनिया भर के विश्वविख्यात भविष्यवक्ताओं ने भी भविष्यवाणी कर कहां है कि 1950 के बाद भारतवर्ष में जन्मा एक  संत पूरी दुनिया को बदल डालेगा
🎇नार्वे के भविष्यवक्ता आनंदाचार्य ने अपनी भविष्यवाणी में कहा है कि एक शक्तिशाली संस्था भारत में प्रकाश लाएगी जिसका स्वामी ग्रहस्त परिवार मे जन्मा संत होगा
 उस महान संत का ज्ञान पूरे विश्व को मानना पड़ेगा

🎇जयगुरूदेव पंथ के प्रवर्तक संत तुलसीदास जी ने साकाहारी पत्रिका में 28 अगस्त 1971 को एक भविष्यवाणी लिखी है कि उस महापुरुष का जन्म भारतवर्ष के एक छोटे से गांव में हो चुका है और वह मानव इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति बनेगा उस महापुरुष को इतना बड़ा समर्थन प्राप्त होगा कि आज तक किसी को नहीं मिला
🎇प्रसिद्ध भविष्यवक्ता डॉक्टर जुलर्वन ने कहा है कि भारत से उठी ज्ञान की क्रांति नास्तिकता को खत्म करके आध्यात्मिकता को बढ़ावा देंगी और उस महान संत के अनुयाई देखते ही देखते एक संस्था के रूप में संपूर्ण विश्व पर अपना प्रभाव जमा लेंगे
इसके अलावा
🎇फ्रांस के सुप्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने कहा है कि मैं आपको स्पष्ट
कर दूं कि आप उस महान संत की अपेक्षा ना करें उसे आराध्य देव मानकर पूजा करना आपके लिए बहुत हितकारी होगा क्योंकि वह आदि पुरुष पूर्ण परमात्मा का अंश दुनिया का तारणहार होगा

सूक्ष्म वेद में आगे परमेश्वर ने बताया है कि
बारहवें पंथ प्रगट हवै वाणी
 शब्द हमारे का निर्णय ठानी

अस्थिर घर का मर्म ना पावे
ये बारह पंथ हमहीं को ध्यांवैं

बाहरवें पंथ हम ही चल आवैं
सब पंथ मिट एक ही पंथ चलावै

प्रथम चरण कलयुग निरयाना
 तब  मगहर मांडौ मैदाना

धर्मराय से मांडौ बाजी
 तब धरि बोधो पंडित काजी

बावन वीर कबीर कहाऊं भवसागर से जीव मुकताऊं

सूक्ष्म वेद में परमेश्वर कबीर जी ने बताया है कि
चौथा युग जब कलयुग आई तब हम अपना अंश पठाई

 काल फंद छूटै नर लोई
 सकल सृष्टि परवानिक होई

 घर-घर देखो बोध विचारा
 सत्यनाम सब ठोर उचारा

पांच हजार पांच सौ पांचा
तब यह वचन होगा सांचा

 कलयुग बीत जाए जब येता
सब जीव परम पुरुष पद चेता

अर्थात कबीर परमेश्वर जी धर्मदास जी को मिले उनको तत्वज्ञान से परिचित करवाया तब परमेश्वर ने कहा था कि धर्मदास जब कलयुग 5505 वर्ष बीत जाएगा ये सभी 12 नकली पंथ समाप्त हो जाएगे फिर उसी 12वें पंथ में आगे हम ही चलकर आएंगे और एक ही कबीर पंथ चलेगा और उसी से पूरे विश्व का कल्याण होगा
कबीर परमेश्वर जी ने धर्मदास जी से कहा था कि एक बार कलयुग में जो मैंने ठीक का समय निर्धारित कर रखा है वो समय आने दे तब अचानक से इस ज्ञान का विस्फोट होगा उसके बाद  धर्मदास जी को परमेश्वर कबीर जी पर पूर्ण विश्वास हुआ और परमेश्वर जी ने धर्मदास जी को नाम उपदेश दे दिया और सतनाम सारनाम का भेद भी बता दिया
 तब परमेश्वर ने धर्मदास जी से कहा था कि
 धर्मदास मेरी लाख दुहाई
ये मूल ज्ञान कहीं बाहर ना जाही

 मूल ज्ञान बाहर जो परही बिचली पीढी हंस नहीं तरही

 पवित्र ज्ञान तुम जग में बांटो मूल ज्ञान गोई तुम रांखो

 इस मूल ज्ञान को तुम तब तक छुपाई
जब तक द्वादश पंथ ना मिट जाई

कबीर परमेश्वर जी ने धर्मदास जी से यह कसम दिलाई थी कि धर्मदास तुझे मेरी लाख बार कसम है यदि तूने इस सतनाम और सारनाम को उजागर कर दिया तो बिचली पीढ़ी यानी कलयुग मैं जो मैंने ठीक का समय निर्धारित कर रखा है उस समय ये जीव पार नहीं हो पाएंगे इसलिए जब तक  कलयुग में काल द्वारा चलाए गए 12 नकली पंथ समाप्त नहीं हो जाए तब तक तू इस सतनाम और सारनाम के भेद को गुप्त रखना

परमेश्वर कबीर जी ने कलयुग को तीन चरणों में बांटा है
 प्रथम चरण - जब परमेश्वर 1398 में काशी (बनारस) में आए थे और 1518 में मगहर से सशरीर सतलोक चले गए थे वह कलयुग का प्रथम चरण था
उसके बाद कलयुग 5505 वर्ष जब समाप्त होगा तब कलयुग का दूसरा चरण शुरू होगा वर्तमान में कलयुग का दूसरा चरण चल रहा है
 तथा अंतिम चरण कलयुग के अंत में होगा

वेदों में पूर्ण परमात्मा की पहचान ➖

पवित्र सामवेद संख्या 359 अध्याय 4 खंड 25 श्लोक 8 में प्रमाण है कि जो (कविर्देव) कबीर साहिब तत्वज्ञान लेकर संसार में आता है वह सर्वशक्तिमान सर्व सुखदाता और सर्व के पूजा करने योग्य है
ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 82 मंत्र 1 में लिखा है कि वह सर्वोत्पादक प्रभु , सृष्टि की रचना करने वाला, पाप कर्मो को हरण करने वाला राजा के समान दर्शनीय है 👉इससे सिद्ध हुआ कि परमात्मा साकार है
ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 86 मंत्र 17 18 ,19 और 20 में प्रमाण है कि परमात्मा कबीर साहेब है
अथर्वेद कांड नंबर 4 अनुवाद 1 मंत्र 7 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब है
यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 1 ,6 और 8 में प्रमाण है कि परमात्मा साकार है
ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 82 मंत्र 1 में लिखा है कि वह परमात्मा पृथ्वी आदि लोकों के चारों तरफ शब्दायमान हो रहा है और वह अच्छी आत्मा को जो दृढ़ भक्त हैं उनको प्राप्त होता है
ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 94 श्लोक 4 में लिखा है कि वह परमात्मा अपने भक्तों को ज्ञान देने के लिए सशरीर आता है और सशरीर चला जाता है

पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में प्रमाण है कि सत्य भक्ति करने वाले साधक के पूर्ण परमात्मा घोर पाप को भी नाश कर देता है
ऋग्वेद मंडल 10 सुक्त 161 मंत्र 2 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब शास्त्र अनुकूल साधना करने वाले साधक के असाध्य रोग को ठीक करके उसे 100 वर्ष की आयु प्रदान कर देता है
अवश्य देखिए 👉साधना टीवी चैनल रात्रि 7:30 बजे
पवित्र कुरान शरीफ सुरत फुर्कानी 25 आयत नंबर 52 से 59 में स्पष्ट लिखा है कि यह कबीर अल्लाह वही समरथ परमात्मा है जिसने संपूर्ण सृष्टि की रचना 6 दिन में की


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Tuesday, June 23, 2020

Kabir Parmeshwar Ji is Real God

जगन्नाथ रथ यात्रा 2020➖

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूरे देश में बड़ी धूमधाम से निकाली जा रही है भगवान जगन्नाथ की रथ यात्राएं, 
वही जगन्नाथ पुरी के राजा गजपति महाराज ने सोने की झाडू से सफाई करके 'छेरा-पहंरा' की रस्म अदा कर दिया धार्मिकता का परिचय। 

जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पलटा फैसला ➖

23 जून मंगलवार को पुरी में होने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला बदल दिया है। कोरोना महासंकट के चलते इस वर्ष भी सुप्रीम कोर्ट ने जगन्नाथ रथ यात्रा को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दे दी है। इससे पहले हम आपको बता दें कि 18 जून को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था, ''यदि  इस साल हमने रथ यात्रा की इजाजत दी तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे।
 कोरोना महामारी के दौरान इतना बड़ा समागम नहीं हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट की विशेष बेंच ने ओडिशा सरकार से कहा है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए राज्य में कहीं भी यात्रा, तीर्थ या इससे जुड़े गतिविधियों की इजाजत ना दें।

जगन्नाथ मंदिर का एक सेवक मिला कोरोना पॉजिटिव ➖

ओडिशा के कानून मंत्री प्रताप जेना ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, जगन्नाथ पुरी मंदिर के सभी पुजारियों और सेवकों का कोरोना टेस्ट किया गया। जिसमें एक सेवक कोरोना पॉजिटिव पाया गया है, जिसके बाद उसे रथयात्रा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है।

पुरी जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा से पहले हुआ सैनेटाइजेशन ➖

सुप्रीम कोर्ट ने जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर सोशल डिस्टेंसिंग का खास ख्याल रखने की हिदायत दी है, तथा यात्रा निकालते समय दो रथों के बीच 1 घंटे का डिस्टेंस और रथों को खींचने के लिए 500 व्यक्तियों की इजाजत दी है। इसके अलावा मंदिर के आसपास सभी जगहों को सैनिटाइज किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार पूरे शहर को बुधवार कल दोपहर 2:00 बजे तक सील कर दिया गया है। तथा इस बार भक्तों को  रथ यात्रा में शामिल होने की इजाजत नहीं दी गई, शहर के लोग घरों में बंद टीवी के माध्यम से ही देख रहे हैं रथ यात्राएं। 

जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर प्रशासन अलर्ट ➖

मुख्य सचिव अजय त्रिपाठी और पुलिस महानिदेशक के अतिरिक्त राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के सभी वरिष्ठ अधिकारी रथयात्रा का जायजा लेने पुरी पहुंच गए हैं। पुलिस महानिदेशक ने कहा है कि नौ दिवसीय उत्सव में सुरक्षा के लिए पुलिस बल की 50 से अधिक प्लाटून तैनात की जा रही हैं। बल की एक प्लाटून में 30 पुलिस कर्मी शामिल हैं।
उड़ीसा राज्य के पुलिस महानिदेशक अभय ने कहा कि पुरी और बाहर के, सभी श्रद्धालु यात्रा को टेलीविजन पर देख सकते हैं। इस बीच पुरी के सभी प्रवेश बिन्दु सील कर दिए गए हैं, और यात्रा तैयारियों से जुड़े वाहनों को छोड़कर अन्य किसी वाहन को आवागमन की अनुमति नहीं है।  राज्य के पुलिस महानिदेशक ने लोगों से अपील की कि वे कोविड-19 महामारी के बीच रथयात्रा का जश्न मनाने के दौरान उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करें। 

जगन्नाथ रथ यात्रा को सुप्रीम कोर्ट ने दी हरी झंडी ➖

सुप्रीम कोर्ट ने पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकालने की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य मुद्दों के साथ बिना समझौता किए और मंदिर समिति, राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय के साथ रथ यात्रा आयोजित की जाएगी। बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 18 जून को हुई सुनवाई में पुरी में 23 जून को होने वाली रथयात्रा को कोरोना महामारी के कारण रोक लगा दी थी।
   लेकिन कोर्ट के फैसले को लेकर कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गई। जिस पर आज सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को पलटते हुए जगन्नाथ रथ यात्रा को कुछ शर्तों के साथ निकालने की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अगर ओडिशा सरकार को लगता है कि कुछ चीजें हाथ से निकल रही हैं तो वो यात्रा को रोक सकते है।
   
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक ट्वीट में कहा है कि, भगवान जगन्नाथ के भक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गजपति महाराज से बात की। मोहंती ने बताया, मुझे आशा है कि उच्चतम न्यायालय इस साल पुरी में रथ यात्रा आयोजित करने की मंजूरी दे देगा। उन्होंने कहा है कि अमित शाह ने उत्सव के साथ जुड़ी धार्मिक भावनाओं को लेकर भी देव के साथ बातचीत की। पुरी की रथ यात्रा में हर साल दुनियाभर से लाखों श्रद्धालु आते हैं।
कोलकाता में मंदिर परिसर में ही निकाली गई जगन्नाथ रथयात्रा➖ 

कोरोना संक्रमण के चलते कोलकाता के इस्कॉन मंदिर परिसर में ही भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली गई। बता दें कि कोरोना के चलते देशभर में धार्मिक आयोजनों पर रोक लगी हुई है।

गुजरात में जगन्नाथ रथयात्रा को नहीं मिली इजाजत➖

गुजरात हाईकोर्ट ने अहमदाबाद में जगन्नाथ यात्रा निकालने की अनुमति नहीं दी है। कोर्ट ने कहा है कि रथयात्रा नहीं निकलने से विश्वास खत्म नहीं हो जाएगा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जेबी परदीवाला की बेंच ने कहा, 'यदि रथयात्रा नहीं होती है तो विश्वास खत्म नहीं हो जाएगा। आस्था इतनी कमजोर नहीं हो सकती। श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बिना यात्रा का कोई अर्थ नहीं है। इसकी अनुमति नहीं दी जाती।' बेंच ने कहा कि रथ यात्रा सिर्फ जगन्नाथ मंदिर परिसर तक ही सीमित रहेगी। मंदिर परिसर में एक वक्त में सिर्फ 10 श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति होगी। यही नहीं थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही श्रद्धालुओं को अंदर जाने की अनुमति होगी।
     रथयात्रा में गुजरात के CM विजय रुपाणी भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर रथयात्रा निकालने की अनुमति मांगी गई थी। लेकिन कोर्ट से इंकार के बाद इसे मंदिर परिसर में ही आयोजित करने का फैसला लिया गया है। इस दौरान लोगों की ज्यादा भीड़ नहीं होने दी जाएगी और थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही मंदिर में प्रवेश मिलेगा।

रामनाथ कोविंद ने रथयात्रा को लेकर दी शुभकामनाएं ➖ 

जगन्नाथ रथयात्रा के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। तथा राष्ट्रपति ने ट्वीट कर लिखा है कि "मैं कामना करता हूं कि प्रभु जगन्नाथ की कृपा, कोविड 19 का सामना करने के लिए हमें साहस व संकल्प शक्ति प्रदान करे। और हमारे जीवन में स्वास्थ्य और आनंद का संचार करे।"
पीएम मोदी ने दी रथयात्रा की शुभकामनाएं ➖

पीएम मोदी ने आज ट्वीट कर भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की शुभकामनाएं दी हैं। पीएम ने कहा कि यह आयोजन देशवासियों के जीवन में खुशी, समृद्धि और सौभाग्य लेकर आए।

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