सूक्ष्म वेद (स्वसमवेद बोध)
पवित्र हिंदू धर्म के साथ-साथ अन्य धर्मों में भी पवित्र वेदों को विशेष माना जाता है पवित्र चारों वेद पूर्ण परमात्मा की महिमा का ही बखान करते हैं लेकिन इन चारों वेदों में वर्णित विधि से पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति नहीं हो सकती पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति सूक्ष्मवेद में वर्णित विधि से होती है जिसके विषय में पवित्र श्रीमदभगवद गीता अध्याय 4 के श्लोक 34 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि हे अर्जुन उस तत्वज्ञान को जो सूक्ष्म वेद में वर्णित है उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी संत के पास जाकर समझ वह तत्वदर्शी संत तुझे उस परमात्म तत्व का ज्ञान कराएंगे
पवित्र गीता अध्याय 15 के श्लोक 4 में भी कहा है कि तत्वज्ञान की प्राप्ति के पश्चात परमेश्वर के उस परमपद की खोज करनी चाहिए जहां जाने के बाद साधक कभी लौटकर इस संसार में नहीं आते अर्थात पूर्ण मोक्ष प्राप्त कर लेते हैं
सृष्टि के प्रारंभ में सागर मंथन के दौरान ज्योति निरंजन (काल) ब्रह्म (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के पिता की श्वासों के माध्यम से चारों वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) प्रकट हुए थे तब ज्योति निरंजन, (ब्रह्म) ने देखा कि इन वेदों में तो पूर्ण परमात्मा की संपूर्ण जानकारी लिखी हुई है तब उसने पूर्ण परमात्मा के विशेष ज्ञान को इन वेदों में से हटा दिया यानी सूक्ष्म वेद के रहस्य को समाप्त कर दिया
जब इस काल भगवान ने पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर के यथार्थ ज्ञान को वेदों में से समाप्त कर दिया था तब उस परमेश्वर ने उसी पांचवे वेद (जिसे सूक्ष्म वेद कहते हैं) का ज्ञान ज्यों का त्यों बताने के लिए स्वयं इस पृथ्वी लोक पर अवतरित होते हैं कवियों की तरह आचरण करते हैं और अपना ज्ञान अपने मुख कमल से दोहो, लोकोक्तियों और चौपाइयों के माध्यम से सुनाते हैं और परमेश्वर के उस ज्ञान को महापुरुषों द्वारा संग्रहित कर लिया जाता है और फिर उसे एक ग्रंथ का रूप दे दिया जाता है जिसे सूक्ष्म वेद कहते हैं
इसी सूक्ष्म वेद के माध्यम से कबीर परमेश्वर जी अपनी महिमा और सतलोक के बारे में यथार्थ जानकारी देते हैं
कबीर परमेश्वर जी कहते हैं कि
वेद मेरा भेद है मैं ना मिलूं वेद से नाही
और जोन वेद से मैं मिलूं ये वेद जानते नाहीं
अर्थात इन चारों वेदों में (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति का पूर्ण ज्ञान नहीं है इनके अलावा एक सूक्ष्म वेद और है जिसमें पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति यानी काल जाल से मुक्त होने का रास्ता बताया गया है कबीर परमेश्वर के ज्ञान की पहचान इसी सूक्ष्म वेद के माध्यम से होती है
पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर जी प्रत्येक युग में इस धरती पर अवतरित होते हैं वे सशरीर आते हैं और सशरीर चले जाते हैं उनकी परवरिश के लिए कंवारी गायों से होती है अर्थात कुंवारी गायों के दूध से ही उनका पालन पोषण होता है
कबीर परमात्मा अपना मुख्य उद्देश्य लेकर इस धरती पर अवतरित होते हैं और वे बचपन से ही बड़े-बड़े ऋषि महर्षियों के अध्यात्म ज्ञान में छक्के छुड़ा देते हैं उनके तत्वज्ञान के सामने कोई भी ऋषि महर्षि टिक नहीं पाते और वे प्रत्येक युग में अपनी प्यारी आत्माओं को मिलते हैं तथा उनको सतलोक अपना निज धाम दिखाते हैं पूर्ण अध्यात्म ज्ञान से परिचित करवाते हैं और फिर उनको अपना गवाह तैयार कर लेते हैं
कबीर परमेश्वर जी कहते हैं
जो देखेगा मेरे धाम को
सो जानत है मुझ
सूक्ष्म वेद के माध्यम से परमेश्वर ने बताया है कि
हिंदू तुरक आदिक सब जेते जीव जहान
सतनाम की साख गहै पावैं पद निर्बान
यथा सरीतगण आपही मिलै सिंधु में धाय
सत सुकृत के मध्य तिमी सबही पंथ समाय
कबीर परमेश्वर जी ने इस वाणी के माध्यम से बताया है कि जिस प्रकार से वर्षा के दिनों में छोटी मोटी नदी नाले सभी मिलकर एक दरिया का रूप ले लेते हैं यानी सभी छोटी मोटी नदियां भी उस समय एक बड़ी नदी का रूप धारण कर लेते हैं अर्थात उसी बडी दरिया में समा जाते हैं ठीक इसी प्रकार कबीर परमेश्वर जी ने बताया है कि जब मेरा अंश कलयुग में अवतार लेगा यानी जब कलयुग 5505 वर्ष बीत जाएगा तब ये सभी नकली पंथ जो भिन्न-भिन्न नाम से चल रहे हैं उस समय ये सभी मेरे द्वारा चलाए गए असली कबीर पंथ में इस प्रकार आकर समा जाएंगे जैसे छोटी मोटी नदी नाले एक बड़ी दरिया में समा जाते हैं
सबही नर नारी शुद्ध तब जब ठीक का दिन आवंत
कपट चातुरी छोड़कर शरण कबीर गहंत
एक अनेक हो गए पुनः अनेक हो एक
हंस चलैं सतलोक को सब सतनाम की टेक
घर-घर बोध विचार हो दुर्मति दूर बहाए
कलयुग एक है सोई बरतै सहज सुभाए
कहां उग्र कहां शूद्र हो हर सबकी भवभीर
सो समान समदृष्टि है समरथ सत्य कबीर
जबलग पूर्ण होए नहीं ठीक का तिथी वार
कपट चातुरी तबहिलों स्वसमवेद निराधार
सूक्ष्म वेद की इस वाणी के माध्यम से कबीर परमेश्वर जी ने बताया है कि धर्मदास जो मैं आज यह बात कह रहा हूं कि यह सभी पंथ समाप्त हो जाएंगे एक ही कबीर पंथ रह जाएगा एक ही भगवान की भक्ति किया करेंगे और कपट, चतुराई, रागद्वेष, चोरी - जारी सभी प्रकार के झगड़े समाप्त हो जाएंगे जाति धर्म के भेदभाव समाप्त हो जाएंगे घर-घर में पूर्ण परमात्मा की भक्ति किया करेंगे और सभी नर और नारी शुद्ध हो जाएंगे उनमें दोष नहीं रहेगा तो ये मेरा वचन सूक्ष्म वेद के माध्यम से कही गई ये वाणी जब तक कलयुग 5505 वर्ष नहीं बीत जाएगा तब तक तो यह निराधार ही नजर आएंगे और जब कलयुग 5505 वर्ष बीत जाएगा तब ये वाणी सच साबित होगी
पांच सहंस अरू पांच सो जब कलयुग बीत जाए
महापुरुष फरमान तब जग तारण को आए
इस वाणी के माध्यम से कबीर परमेश्वर जी कह रहे हैं कि हे धर्मदास जब कलयुग 5505 वर्ष बीत जाएगा तब उस समय एक महापुरुष अवतार लेगा जो पूरे विश्व का कल्याण करेगा उस महापुरुष के बारे में दुनिया भर के विश्वविख्यात भविष्यवक्ताओं ने भी भविष्यवाणी कर कहां है कि 1950 के बाद भारतवर्ष में जन्मा एक संत पूरी दुनिया को बदल डालेगा
🎇नार्वे के भविष्यवक्ता आनंदाचार्य ने अपनी भविष्यवाणी में कहा है कि एक शक्तिशाली संस्था भारत में प्रकाश लाएगी जिसका स्वामी ग्रहस्त परिवार मे जन्मा संत होगा
उस महान संत का ज्ञान पूरे विश्व को मानना पड़ेगा
🎇जयगुरूदेव पंथ के प्रवर्तक संत तुलसीदास जी ने साकाहारी पत्रिका में 28 अगस्त 1971 को एक भविष्यवाणी लिखी है कि उस महापुरुष का जन्म भारतवर्ष के एक छोटे से गांव में हो चुका है और वह मानव इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति बनेगा उस महापुरुष को इतना बड़ा समर्थन प्राप्त होगा कि आज तक किसी को नहीं मिला
🎇प्रसिद्ध भविष्यवक्ता डॉक्टर जुलर्वन ने कहा है कि भारत से उठी ज्ञान की क्रांति नास्तिकता को खत्म करके आध्यात्मिकता को बढ़ावा देंगी और उस महान संत के अनुयाई देखते ही देखते एक संस्था के रूप में संपूर्ण विश्व पर अपना प्रभाव जमा लेंगे
इसके अलावा
🎇फ्रांस के सुप्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने कहा है कि मैं आपको स्पष्ट
कर दूं कि आप उस महान संत की अपेक्षा ना करें उसे आराध्य देव मानकर पूजा करना आपके लिए बहुत हितकारी होगा क्योंकि वह आदि पुरुष पूर्ण परमात्मा का अंश दुनिया का तारणहार होगा
सूक्ष्म वेद में आगे परमेश्वर ने बताया है कि
बारहवें पंथ प्रगट हवै वाणी
शब्द हमारे का निर्णय ठानी
अस्थिर घर का मर्म ना पावे
ये बारह पंथ हमहीं को ध्यांवैं
बाहरवें पंथ हम ही चल आवैं
सब पंथ मिट एक ही पंथ चलावै
प्रथम चरण कलयुग निरयाना
तब मगहर मांडौ मैदाना
धर्मराय से मांडौ बाजी
तब धरि बोधो पंडित काजी
बावन वीर कबीर कहाऊं भवसागर से जीव मुकताऊं
सूक्ष्म वेद में परमेश्वर कबीर जी ने बताया है कि
चौथा युग जब कलयुग आई तब हम अपना अंश पठाई
काल फंद छूटै नर लोई
सकल सृष्टि परवानिक होई
घर-घर देखो बोध विचारा
सत्यनाम सब ठोर उचारा
पांच हजार पांच सौ पांचा
तब यह वचन होगा सांचा
कलयुग बीत जाए जब येता
सब जीव परम पुरुष पद चेता
अर्थात कबीर परमेश्वर जी धर्मदास जी को मिले उनको तत्वज्ञान से परिचित करवाया तब परमेश्वर ने कहा था कि धर्मदास जब कलयुग 5505 वर्ष बीत जाएगा ये सभी 12 नकली पंथ समाप्त हो जाएगे फिर उसी 12वें पंथ में आगे हम ही चलकर आएंगे और एक ही कबीर पंथ चलेगा और उसी से पूरे विश्व का कल्याण होगा
कबीर परमेश्वर जी ने धर्मदास जी से कहा था कि एक बार कलयुग में जो मैंने ठीक का समय निर्धारित कर रखा है वो समय आने दे तब अचानक से इस ज्ञान का विस्फोट होगा उसके बाद धर्मदास जी को परमेश्वर कबीर जी पर पूर्ण विश्वास हुआ और परमेश्वर जी ने धर्मदास जी को नाम उपदेश दे दिया और सतनाम सारनाम का भेद भी बता दिया
तब परमेश्वर ने धर्मदास जी से कहा था कि
धर्मदास मेरी लाख दुहाई
ये मूल ज्ञान कहीं बाहर ना जाही
मूल ज्ञान बाहर जो परही बिचली पीढी हंस नहीं तरही
पवित्र ज्ञान तुम जग में बांटो मूल ज्ञान गोई तुम रांखो
इस मूल ज्ञान को तुम तब तक छुपाई
जब तक द्वादश पंथ ना मिट जाई
कबीर परमेश्वर जी ने धर्मदास जी से यह कसम दिलाई थी कि धर्मदास तुझे मेरी लाख बार कसम है यदि तूने इस सतनाम और सारनाम को उजागर कर दिया तो बिचली पीढ़ी यानी कलयुग मैं जो मैंने ठीक का समय निर्धारित कर रखा है उस समय ये जीव पार नहीं हो पाएंगे इसलिए जब तक कलयुग में काल द्वारा चलाए गए 12 नकली पंथ समाप्त नहीं हो जाए तब तक तू इस सतनाम और सारनाम के भेद को गुप्त रखना
परमेश्वर कबीर जी ने कलयुग को तीन चरणों में बांटा है
प्रथम चरण - जब परमेश्वर 1398 में काशी (बनारस) में आए थे और 1518 में मगहर से सशरीर सतलोक चले गए थे वह कलयुग का प्रथम चरण था
उसके बाद कलयुग 5505 वर्ष जब समाप्त होगा तब कलयुग का दूसरा चरण शुरू होगा वर्तमान में कलयुग का दूसरा चरण चल रहा है
तथा अंतिम चरण कलयुग के अंत में होगा
वेदों में पूर्ण परमात्मा की पहचान ➖
पवित्र सामवेद संख्या 359 अध्याय 4 खंड 25 श्लोक 8 में प्रमाण है कि जो (कविर्देव) कबीर साहिब तत्वज्ञान लेकर संसार में आता है वह सर्वशक्तिमान सर्व सुखदाता और सर्व के पूजा करने योग्य है
ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 82 मंत्र 1 में लिखा है कि वह सर्वोत्पादक प्रभु , सृष्टि की रचना करने वाला, पाप कर्मो को हरण करने वाला राजा के समान दर्शनीय है 👉इससे सिद्ध हुआ कि परमात्मा साकार है
ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 86 मंत्र 17 18 ,19 और 20 में प्रमाण है कि परमात्मा कबीर साहेब है
अथर्वेद कांड नंबर 4 अनुवाद 1 मंत्र 7 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब है
यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 1 ,6 और 8 में प्रमाण है कि परमात्मा साकार है
ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 82 मंत्र 1 में लिखा है कि वह परमात्मा पृथ्वी आदि लोकों के चारों तरफ शब्दायमान हो रहा है और वह अच्छी आत्मा को जो दृढ़ भक्त हैं उनको प्राप्त होता है
ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 94 श्लोक 4 में लिखा है कि वह परमात्मा अपने भक्तों को ज्ञान देने के लिए सशरीर आता है और सशरीर चला जाता है
पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में प्रमाण है कि सत्य भक्ति करने वाले साधक के पूर्ण परमात्मा घोर पाप को भी नाश कर देता है
ऋग्वेद मंडल 10 सुक्त 161 मंत्र 2 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब शास्त्र अनुकूल साधना करने वाले साधक के असाध्य रोग को ठीक करके उसे 100 वर्ष की आयु प्रदान कर देता है
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पवित्र कुरान शरीफ सुरत फुर्कानी 25 आयत नंबर 52 से 59 में स्पष्ट लिखा है कि यह कबीर अल्लाह वही समरथ परमात्मा है जिसने संपूर्ण सृष्टि की रचना 6 दिन में की
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