उसके बाद एक दिन उनको परमेश्वर कबीर जी मिले जैसा कि सूक्ष्म वेद में बताया गया है कि वह परमात्मा पूर्व जन्मों के शुभ संस्कारी प्राणियों को सतलोक से आकर मिलते हैं उनको अपना तत्वज्ञान समझाते हैं और फिर उन्हें मोक्ष का रास्ता दिखाते हैं
ठीक इसी प्रकार एक समय कबीर परमेश्वर जी नामदेव जी को मिले तथा जैसी उनकी भक्ति में आस्था थी उसी आस्था को मध्य नजर कबीर परमेश्वर ने उनको ओम नाम जाप करने को दिया। तथा नामदेव जी ओम नाम का जाप करने लगे।
एक समय की बात है एक मंदिर में आरती पूजा चल रही थी, तो नामदेव जी उस रास्ते से गुजर रहे थे, नामदेव जी की आत्मा इतनी आत्मविभोर हो उठी कि उस मंदिर के पीछे बैठकर अपनी चप्पलों से घंटी बजाने लगे तब कबीर परमेश्वर जी ने अपने भगत की आस्था और इस मर्यादा को बनाए रखने के लिए उस मंदिर को ही घुमा दिया था यानी नामदेव जी जिस मंदिर के पीछे बैठे थे उस मंदिर का मुंह नामदेव जी की तरफ कर दिया।
इस प्रकार कबीर परमेश्वर जी अपनी भक्ति मर्यादा और लोगों में भगवान की आस्था बनाए रखने के लिए अपने भक्तों के साथ ऐसे ऐसे चमत्कार करते रहते हैं।
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