पवित्र श्रीमद भगवद गीता अध्याय 6 के श्लोक 16 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि हे अर्जुन ये भक्ति, योग साधना ना तो अधिक खाने वाले की ओर ना ही बिल्कुल ना खाने वाले की सफल हो सकती। अर्थात व्रत आदि करना व्यर्थ साधना है
शास्त्र विरुद्ध पूजा व्यर्थ
पवित्र श्रीमद भगवद गीता अध्याय 16 श्लोक 23 और 24 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि अर्जुन शास्त्र विधि को त्याग कर मनमाना आचरण करते हैं उनको न तो किसी प्रकार का लाभ मिलता और ना ही उनके कोई कार्य सिद्ध होते तथा ना ही वे मोक्ष को प्राप्त कर सकते!
शास्त्र अनुकूल भक्ति क्या है
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 के श्लोक 23 में गीता ज्ञान दाता ने ओम, तत्, सत ये तीन मंत्र मोक्ष के बताएं हैं इन तीन मंत्रों के जाप से ही मुक्ति संभव है तथा इसके अलावा गीता अध्याय 4 के श्लोक 34 में कहा है की उस तत्वज्ञान को तू उन तत्वदर्शी संत के पास जाकर समझ उनको भली-भांति दंडवत प्रणाम करने से वे तुझे तत्वज्ञान का उपदेश करेंगे और फिर जैसे वे साधना बताएं वैसे भक्ति साधना कर उसी से तेरा मोक्ष संभव है
पूर्ण परमात्मा (अविनाशी पुरुष) कौन है
वेद गवाही देते हैं की 6 दिन में सृष्टि की रचना करने वाला पाप कर्मों को हरण करने वाला, वह सर्वोउत्पादक प्रभु कबीर साहिब है जो सतलोक के तीसरे मुक्तिधाम में राजा के समान सिंहासन पर विराजमान है
ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 82 मंत्र 1 में लिखा है कि वह सर्वोत्पादक प्रभु , सृष्टि की रचना करने वाला, पाप कर्मो को हरण करने वाला राजा के समान दर्शनीय है 👉इससे सिद्ध हुआ कि परमात्मा साकार है
पवित्र सामवेद संख्या 359 अध्याय 4 खंड 25 श्लोक 8 में प्रमाण है कि जो (कविर्देव) कबीर साहिब तत्वज्ञान लेकर संसार में आता है वह सर्वशक्तिमान सर्व सुखदाता और सर्व के पूजा करने योग्य है
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