Wednesday, July 15, 2020

शास्त्र विरुद्ध साधना व्यर्थ

पवित्र श्रीमद भगवद गीता अध्याय 6 के श्लोक 16 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि हे अर्जुन ये भक्ति, योग साधना ना तो अधिक खाने वाले की ओर ना ही बिल्कुल ना खाने वाले की सफल हो सकती। अर्थात व्रत आदि करना व्यर्थ साधना है 

शास्त्र विरुद्ध पूजा व्यर्थ

 पवित्र श्रीमद भगवद गीता अध्याय 16 श्लोक 23 और 24 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि अर्जुन शास्त्र विधि को त्याग कर मनमाना आचरण करते हैं उनको न तो किसी प्रकार का लाभ मिलता और ना ही उनके कोई कार्य सिद्ध होते तथा ना ही वे मोक्ष को प्राप्त कर सकते!

शास्त्र अनुकूल भक्ति क्या है

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 के श्लोक 23 में गीता ज्ञान दाता ने ओम, तत्, सत ये तीन मंत्र मोक्ष के बताएं हैं इन तीन मंत्रों के जाप से ही मुक्ति संभव है तथा इसके अलावा गीता अध्याय 4 के श्लोक 34 में कहा है की उस तत्वज्ञान को तू उन तत्वदर्शी संत के पास जाकर समझ उनको भली-भांति दंडवत प्रणाम करने से वे तुझे तत्वज्ञान का उपदेश करेंगे और फिर जैसे वे साधना बताएं वैसे भक्ति साधना कर उसी से तेरा मोक्ष संभव है


पूर्ण परमात्मा (अविनाशी पुरुष) कौन है

वेद गवाही देते हैं की 6 दिन में सृष्टि की रचना करने वाला पाप कर्मों को हरण करने वाला, वह सर्वोउत्पादक प्रभु कबीर साहिब है जो सतलोक के तीसरे मुक्तिधाम में राजा के समान सिंहासन पर विराजमान है

ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 82 मंत्र 1 में लिखा है कि वह सर्वोत्पादक प्रभु , सृष्टि की रचना करने वाला, पाप कर्मो को हरण करने वाला राजा के समान दर्शनीय है 👉इससे सिद्ध हुआ कि परमात्मा साकार है

पवित्र सामवेद संख्या 359 अध्याय 4 खंड 25 श्लोक 8 में प्रमाण है कि जो (कविर्देव) कबीर साहिब तत्वज्ञान लेकर संसार में आता है वह सर्वशक्तिमान सर्व सुखदाता और सर्व के पूजा करने योग्य है


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Wednesday, July 8, 2020

True Guru Saint Rampal Ji

पूर्ण गुरु के बिना मोक्ष संभव नहीं

यह तो सभी जानते हैं कि गुरु के बिना मुक्ति नहीं हो सकती पूर्ण मोक्ष के लिए हमें गुरु बनाना अति आवश्यक है। जैसा कि इतिहास गवाह है कि बड़े-बड़े महापुरुषों ने भी गुरु धारण किया है श्री राम और श्री कृष्ण ने भी गुरु धारण किया था। यानी हमें इस लोक से पार होने के लिए गुरु बनाना अति आवश्यक है यहां तक की कबीर जी स्वयं परमात्मा होते हुए भी उन्होंने स्वामी रामानंद जी को गुरु धारण किया था। इनको गुरु धारण करने की कोई आवश्यकता भी नहीं थी, लेकिन गुरु परंपरा और भक्ति मर्यादा को बनाए रखने के लिए उन्होंने गुरु धारण किया था।
 

लेकिन आज भक्त समाज के सामने सबसे बड़ी समस्या ये है कि वह पूर्ण संत सच्चा आध्यात्मिक गुरु कौन हो सकता है। 

दुनिया के सभी देशों में भारत एक ऐसा देश है जहां अनेकों धर्म और  समुदाय को माना जाता है। और यही कारण है कि भारत में हजारों लाखों व्यक्ति गुरु पद पर विराजमान है, लेकिन हमें यह जानना बेहद जरूरी होगा कि उन हजारों लाखों की भीड़ में आखिर वह सच्चा आध्यात्मिक गुरु कौन है, जी हां हमें सबसे पहले यह जानना होगा कि उस संत का ज्ञान शास्त्रों से कितना मेल खाता है यदि जिसका ज्ञान वेद और शास्त्रों से मेल खाता है और जिनको पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति हुई है वह वास्तव में सच्चा अध्यात्मिक गुरु है जी हां दोस्तों इस दुनिया में वह महान संत तथा अध्यात्मिक  गुरु केवल जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज है जिनका ज्ञान वेद और शास्त्रों से मेल खाता है तथा जिनको परमात्मा की प्राप्ति हुई। 
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 अवश्य सुनिए संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन प्रतिदिन 👉साधना टीवी चैनल पर शाम 7:30 बजे

Wednesday, July 1, 2020

History of Namdev

एक समय की बात है नामदेव नाम का एक भगत था जो परमेश्वर कबीर जी का शिष्य बना। कबीर परमेश्वर जी का शिष्य बनने से पहले नामदेव जी ओम नाम का जाप करते थे तथा देवी-देवताओं की पूजा किया करते थे। 

उसके बाद एक दिन उनको परमेश्वर कबीर जी मिले जैसा कि सूक्ष्म वेद में बताया गया है कि वह परमात्मा पूर्व जन्मों के शुभ संस्कारी प्राणियों को सतलोक से आकर मिलते हैं उनको अपना तत्वज्ञान समझाते हैं और फिर उन्हें मोक्ष का रास्ता दिखाते हैं

 ठीक इसी प्रकार एक समय कबीर परमेश्वर जी नामदेव जी को मिले तथा जैसी उनकी भक्ति में आस्था थी उसी आस्था को मध्य नजर कबीर परमेश्वर ने उनको ओम नाम जाप करने को दिया। तथा नामदेव जी ओम नाम का जाप करने लगे। 

एक समय की बात है एक मंदिर में आरती पूजा चल रही थी, तो नामदेव जी उस रास्ते से गुजर रहे थे, नामदेव जी की आत्मा इतनी आत्मविभोर हो उठी कि उस मंदिर के पीछे बैठकर अपनी चप्पलों से घंटी बजाने लगे तब कबीर परमेश्वर जी ने अपने भगत की आस्था और इस मर्यादा को बनाए रखने के लिए उस मंदिर को ही घुमा दिया था यानी नामदेव जी जिस मंदिर के पीछे बैठे थे उस मंदिर का मुंह नामदेव जी की तरफ कर दिया। 


इस प्रकार कबीर परमेश्वर जी अपनी भक्ति मर्यादा और लोगों में भगवान की आस्था बनाए रखने के लिए अपने भक्तों के साथ ऐसे ऐसे चमत्कार करते रहते हैं। 

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Our savior is the God kabir

मनुष्य के दुखों का मूल कारण है पाप कर्म, पाप कर्म बढ़ जाने पर मनुष्य को बीमारियां घेर लेती है बीमारी किसी भी प्रकार की हो सकती हैं (कैंसर,क...