भारत को पूर्व में सोने की चिड़िया कहा जाता था क्योंकि भारतवर्ष पर शुरू से ही संतों की कृपा रही है
सन 1950 से पहले भारत में चोरी - जारी, लूटा खसोट, दंगे और अपराध बिल्कुल भी नहीं होते थे लेकिन 1950 के बाद भारत में जैसे ही शिक्षा ने कदम रखा तो उसके बाद से ही लोगों में अशांति नजर आने लगी है
वर्तमान में इस शिक्षा ने युवा वर्ग को पूरी तरह से बेचैन कर रखा है लोगों में आपसी प्यार नहीं रहा समाज में चोरी - जारी, व्यभिचारी, लूट खसोट और अपराध बढ़ गए हैं
इस विज्ञान ने हमें नास्तिक बना डाला हमें भगवान से कोसों दूर कर दिया लेकिन वहीं दूसरी तरफ भारतवर्ष में जन्में एक संत ने लोगों में भगवान के प्रति विश्वास को पुनः जागृत किया है और वेदों और शास्त्रों की यथार्थता से समाज को परिचित करवाया है
जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान से अब समाज में अपराधों में गिरावट आई है संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि व्यभिचार करने वाला रिश्वतखोरी लूट खसोट करने वाले प्राणी का कभी उद्धार नहीं हो सकता वह अपने जीवन में कभी खुश नहीं रह सकता संत जी के तत्वज्ञान से अब समाज में एक बार फिर से लोगों में धार्मिक भावनाएं जागृत हुई है
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के आध्यात्मिक ज्ञान से अब भारत फिर से सोने की चिड़िया और विश्वगुरु के रूप में विख्यात होगा
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