Real God Is Kabir
जब इस काल भगवान ने पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर के यथार्थ ज्ञान को वेदों में से समाप्त कर दिया था तब उस परमेश्वर ने उसी पांचवे वेद (जिसे सूक्ष्म वेद कहते हैं) का ज्ञान ज्यों का त्यों बताने के लिए स्वयं इस पृथ्वी लोक पर अवतरित होते हैं कवियों की तरह आचरण करते हैं और अपना ज्ञान अपने मुख कमल से दोहो, लोकोक्तियों और चौपाइयों के माध्यम से सुनाते हैं और परमेश्वर के उस ज्ञान को महापुरुषों द्वारा संग्रहित कर लिया जाता है और फिर उसे एक ग्रंथ का रूप दे दिया जाता है जिसे सूक्ष्म वेद कहते हैं
इसी सूक्ष्म वेद के माध्यम से कबीर परमेश्वर जी अपनी महिमा और सतलोक के बारे में यथार्थ जानकारी देते हैं
कबीर परमेश्वर जी कहते हैं कि
वेद मेरा भेद है मैं ना मिलूं वेद से नाही
और जोन वेद से मैं मिलूं ये वेद जानते नाहीं
अर्थात इन चारों वेदों में (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति का पूर्ण ज्ञान नहीं है इनके अलावा एक सूक्ष्म वेद और है जिसमें पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति यानी काल जाल से मुक्त होने का रास्ता बताया गया है कबीर परमेश्वर के ज्ञान की पहचान इसी सूक्ष्म वेद के माध्यम से होती है
पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर जी प्रत्येक युग में इस धरती पर अवतरित होते हैं वे सशरीर आते हैं और सशरीर चले जाते हैं उनकी परवरिश के लिए कंवारी गायों से होती है अर्थात कुंवारी गायों के दूध से ही उनका पालन पोषण होता है
कबीर परमात्मा अपना मुख्य उद्देश्य लेकर इस धरती पर अवतरित होते हैं और वे बचपन से ही बड़े-बड़े ऋषि महर्षियों के अध्यात्म ज्ञान में छक्के छुड़ा देते हैं उनके तत्वज्ञान के सामने कोई भी ऋषि महर्षि टिक नहीं पाते और वे प्रत्येक युग में अपनी प्यारी आत्माओं को मिलते हैं तथा उनको सतलोक अपना निज धाम दिखाते हैं पूर्ण अध्यात्म ज्ञान से परिचित करवाते हैं और फिर उनको अपना गवाह तैयार कर लेते हैं
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