जन्माष्टमी 2020 ➖
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मथुरा (उत्तर प्रदेश) में विष्णु अवतार श्री कृष्ण का जन्म हुआ श्री कृष्ण के जन्म के दिन को जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है। और जन्माष्टमी के इस अवसर को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, श्री कृष्ण जी द्वापर युग में आए थे, कृष्ण जी का जन्म जेल में हुआ था, माना यह जाता है कि माता देवकी की 7 कन्याओं के बाद विष्णु अवतार श्री कृष्ण का जन्म हुआ, कृष्ण जी देवकी की आठवीं संतान थी और खुद उनके मामा कंस उनके शत्रु बन गये। कभी जरासिंध कभी चाणोर तो कभी कालयवन एक के बाद एक ने श्री कृष्ण के साथ युद्ध किया जब तक वह मथुरा में रहे तब तक उनको सुख का सांस नहीं लेने दिया।
अंत में श्री कृष्ण ने द्वारिका गुजरात मैं जाकर अपना समय व्यतीत किया।
2020 में जन्माष्टमी कितनी तारीख को है ➖
इस वर्ष सन् 2020 में जन्माष्टमी मंगलवार 11 अगस्त को मनाई जाएगी
सीमित शक्ति के भगवान श्री कृष्ण ➖
जब पांडव जुआ में हार चुके थे तब भरी सभा में द्रोपती का चीर हरण किया जा रहा था, तब परमेश्वर कबीर जी ने ही श्री कृष्ण के रूप में द्रोपती की साड़ी बढ़ाई थी।
इसके बाद जब पांडवों ने अश्वमेध यज्ञ की तो ब्रह्मा विष्णु महेश, 33 करोड़ देवी देवता 88 हजार ऋषि तथा खुद श्री कृष्ण भी उस यज्ञ में भोजन खा चुके थे लेकिन फिर भी उनका शंख नहीं बजा, तब कबीर परमेश्वर जी ने अपने भगत सुपच सुदर्शन का रूप धारण करके उस यज्ञ में भंडारा किया तब वह संख बजा और पांडवों की यज्ञ सफल हुई।
असीमित शक्ति के भगवान कबीर परमेश्वर ➖
श्री कृष्ण जी के भोजन खाने से भी वह शंख नहीं बजा क्योंकि ये सुप्रीम पावर नहीं है ये सीमित शक्ति के भगवान हैं।
श्री कृष्ण जी ने अपने बचपन के दोस्त सुदामा की एक मुट्ठी चावल खाकर उसका सुंदर महल बना दिया और कबीर परमेश्वर जी ने तैमूरलंग की एक रोटी खाकर उसको 7 पीढ़ी का राज्य दे दिया।
कृष्ण जी सीमित शक्ति के भगवान हैं क्योंकि यह विष्णु अवतार थे और ब्रह्मा विष्णु महेश उनकी ताकत सीमित है
ये किए हुइ कर्म को नहीं काट सकते भाग्य में परिवर्तन नहीं कर सकते अपने किए कर्म का फल इन्हें खुद को भी भुगतना पड़ता है क्योंकि ये काल के अधीन है।
ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान है दुर्गा इनकी माता है और काल ज्योति निरंजन इनका पिता है वह असीमित शक्ति का भगवान कबीर परमेश्वर जी है जो साधक के घोर पाप को पल भर में समाप्त कर देता है तथा यदि रोगी मृत्यु शैया के निकट भी पहुंच गया हो तो उसे स्वस्थ करके 100 वर्ष की आयु प्रदान कर देता है ये गुण समरथ परमात्मा में होते हैं
कबीर परमेश्वर जी ही वह अविनाशी परमेश्वर है जो कभी जन्म मृत्यु में नहीं आता वह परमेश्वर प्रत्येक युग में इस धरती पर सशरीर अवतरित होते हैं तथा वे कभी मां के गर्भ से जन्म नहीं लेते तथा उनका शरीर पांच तत्वों से बना हुआ नहीं है।
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