Wednesday, June 10, 2020

True Spritual Knowledge

  • Holy Bible
पवित्र ईसाई धर्म में बाइबल को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है पवित्र बाइबल में तीन पुस्तकों का संग्रह है (तोरात, इंजिल और जंबूर) 
इन्हीं पवित्र पुस्तकों के आधार पर ईसाई धर्म में भक्ति साधनाएं की जाती है
पवित्र ईसाई धर्म में भी कुछ लोग अल्लाह का आदेश बताकर मांस खाते हैं जो कि बिल्कुल गलत है

मांस खाना परमेश्वर का आदेश नहीं➖

उस परमेश्वर ने पवित्र बाइबल में कहीं पर भी मांस खाने का आदेश नहीं दिखा
पवित्र बाइबल उत्पत्ति ग्रंथ पृष्ठ 2 पर लिखा है कि जितने भी बीज वाले पेड़ और उन पेड़ों में जितने बीज वाले फल है वे मनुष्य के भोजन के लिए है इसमें मांस खाने का आदेश कहीं नहीं लिखा
क्या ईसा मसीह भगवान थे➖

     ईसा मसीह जी ने अपने जीवन में भक्ति साधना तो खूब की ईसा मसीह जी ने अपने जीवन में सच्चाई के लिए खूब संघर्ष किया परंतु ब्रह्म के फरिश्तों को सच्चाई रास नहीं आई और अंततः ईसा मसीह जी को कृष कर दिया गया क्योंकि ईसा मसीह की साधना शास्त्र विरुद्ध थी यदि उनकी साधना शास्त्र अनुकूल होती तो उनको ऐसी खतरनाक सजा नहीं भुगतनी पड़ती
हजरत ईसा मसीह की मृत्यु पूर्व निर्धारित थी ईसा मसीह जी ने खुद यह कहा कि मेरी मृत्यु निकट है तथा 12 शिष्यों में से एक मुझे विरोधियों को पकड़ाएगा और ऐसा ही हुआ
यीशु मसीह जी को उनके ही 12 शिष्यों में से एक खास शिष्य ने ₹30 के लालच में उनको सूली तुड़वा दिया
 यदि यीशु की भक्ति सही होती तो उनकी मृत्यु दर्दनाक तरीके से नहीं होती
कौन है सर्वशक्तिमान परमेश्वर ➖

   अभी तक ईसाई धर्म मैं ईसा मसीह जी को भगवान का अवतार माना जाता है ईसाई धर्म के लोगों का मानना है कि ईसा मसीह जी ने ही सारी सृष्टि की रचना की है और वे ही भगवान है जबकि हमारे पवित्र वेदों में प्रमाण है कि वह अल्लाह, रब, भगवान कभी मां के गर्भ से जन्म नहीं लेता जबकि ईसा मसीह जी ने अपनी मां मरियम के गर्भ से जन्म लिया था वह भगवान नहीं हो सकता 
वह सर्वशक्तिमान, पूर्ण परमात्मा जिसने सारी सृष्टि की रचना की अर्थात जिसके बारे में पवित्र बाइबल उत्पत्ति ग्रंथ पृष्ठ नंबर 2 अध्याय 1:20 - 2:5 में लिखा है कि छठवें दिन पूर्ण परमात्मा कविर्देव ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया और फिर सृष्टि रचना शुरू हुई
इससे ये भी सिद्ध होता है कि वह परमात्मा साकार है और वही असंख्य ब्रह्मांडों का तथा इस सृष्टि का जनक है जो कभी मां के गर्भ से जन्म नहीं लेता और वह कभी जन्म मृत्यु में नहीं आता अर्थात वह अचल अविनाशी परमात्मा है
वेदों में लिखा है कि जब धरती पर धर्म की हानि होती है तब परमात्मा कविर्देव काल के अज्ञान रूपी किले को तत्व ज्ञान रूपी शस्त्र से तोड़ कर अध्यात्म ज्ञान प्रकट करते हैं और वही पूर्ण परमात्मा सर्व के पूजा करने योग्य है
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